1. प्रस्तावना
घरेलू हिंसा महिलाओं के विरुद्ध होने वाला एक गंभीर अपराध है जो उनके बुनियादी मानवाधिकारों का हनन करता है। गुना जिले के बमोरी विकास खंड के ग्रामीण और जनजातीय परिवेश में घरेलू हिंसा का स्वरूप शहरी क्षेत्रों से कुछ भिन्न है। यहाँ शारीरिक मारपीट और आर्थिक दुर्व्यवहार के मामले अधिक देखे जाते हैं। स्थानीय पुलिस थाना बमोरी, 'वन स्टॉप सेंटर' (सखी) गुना और क्षेत्रीय गैर-सरकारी संगठनों के अनुभवों के आधार पर इस क्षेत्र में घरेलू हिंसा की स्थिति का सघन अध्ययन किया गया।
2. बमोरी क्षेत्र में घरेलू हिंसा के उत्तरदायी स्थानीय कारण
क. अत्यधिक नशाखोरी (कच्ची शराब का सेवन)
बमोरी ब्लॉक के ग्रामीण और सहरिया अंचलों में घरेलू हिंसा का सबसे बड़ा और तात्कालिक कारण शराब का अत्यधिक सेवन है। स्थानीय स्तर पर बनने वाली कच्ची महुआ शराब या सस्ती शराब पीकर पुरुष शाम को घर लौटते हैं और अकारण पत्नी व बच्चों के साथ हिंसक मारपीट करते हैं। मजदूरी के पैसे शराब में उड़ा देना एक विकराल समस्या है।
ख. घोर आर्थिक तंगी एवं मौसमी बेरोजगारी
कृषि में अनिश्चितता और वर्ष भर रोजगार न मिलने के कारण परिवारों में अत्यधिक वित्तीय तनाव रहता है। यह हताशा और क्रोध अक्सर घर की महिलाओं पर शारीरिक या मौखिक हिंसा के रूप में निकलता है। जब महिलाएं घर खर्च के लिए पैसे मांगती हैं, तो विवाद उत्पन्न होता है।
ग. अशिक्षा एवं अधिकारों के प्रति पूर्ण अनभिज्ञता
बमोरी अंचल की अधिकांश पीड़ित महिलाओं को 'घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005' की कोई जानकारी नहीं है। पारंपरिक संस्कारों के कारण वे पति की प्रताड़ना को अपनी 'किस्मत' या 'पति का अधिकार' मानकर सहती रहती हैं। पुलिस में जाने को पारिवारिक प्रतिष्ठा के खिलाफ माना जाता है।
घ. दहेज एवं सामाजिक कुरीतियाँ
गैर-आदिवासी ग्रामीण समाजों में आज भी विवाह के बाद मायके से मोटरसाइकिल, नकद धन या अन्य सामान लाने के लिए नवविवाहिताओं को प्रताड़ित किया जाता है। 'पुत्र मोह' (बेटे की चाहत) के कारण लगातार बेटियाँ पैदा होने पर महिला को ताने दिए जाते हैं और दूसरी शादी की धमकियाँ दी जाती हैं।
3. पीड़ित महिलाओं और बच्चों पर दुष्प्रभाव
- शारीरिक व मानसिक आघात: गंभीर चोटें, अवसाद, और कई मामलों में प्रताड़ना से तंग आकर महिलाओं द्वारा कुएं में कूदकर या कीटनाशक पीकर आत्महत्या कर लेने की दुखद घटनाएं बमोरी क्षेत्र में सामने आती हैं।
- बच्चों के भविष्य पर असर: हिंसक माहौल में पले-बढ़े बच्चों में स्कूल के प्रति अरुचि और बालकों में आगे चलकर हिंसक व्यवहार की प्रवृत्ति विकसित हो जाती है।
4. बमोरी क्षेत्र के लिए विशेष रोकथाम के उपाय
| हस्तक्षेप का स्तर | प्रस्तावित सुधारात्मक कार्ययोजना (बमोरी संदर्भ) |
|---|---|
| सामुदायिक एवं नशा मुक्ति | ब गाँवों में 'नशा मुक्ति वाहिनी' और महिला समितियों का गठन कर अवैध शराब की बिक्री पर पूर्ण रोक लगाई जाए। पुलिस प्रशासन की बीट व्यवस्था को सघन किया जाए। |
| संस्थागत सहायता | बमोरी ब्लॉक स्तर पर 'पारिवारिक परामर्श केंद्र' (Family Counseling Centre) की स्थापना हो, ताकि पीड़ितों को सहायता के लिए 40 किमी दूर गुना न जाना पड़े। |
| आर्थिक पुनर्वास | पीड़ित महिलाओं को 'आजीविका मिशन' के तहत प्राथमिकता से ऋण और सिलाई/हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देकर आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया जाए। |
5. निष्कर्ष
बमोरी विकास खंड को घरेलू हिंसा मुक्त बनाने के लिए सामाजिक चेतना और कानूनी सख्ती दोनों की समानांतर आवश्यकता है। जब तक पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता नहीं बदलेगी और शराबखोरी पर लगाम नहीं लगेगी, तब तक बमोरी की महिलाओं का जीवन सुरक्षित नहीं हो सकेगा।