1. प्रस्तावना
कल्याणकारी राज्य के दायित्वों के तहत मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण विकास, जनजातीय उत्थान और सामाजिक सुरक्षा के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। गुना जिले का बमोरी विकास खंड अपनी आर्थिक पिछड़ेपन के कारण इन योजनाओं के सघन क्रियान्वयन का केंद्र रहा है। प्रस्तुत प्रतिवेदन में बमोरी क्षेत्र में प्रभावी ढंग से संचालित प्रमुख योजनाओं और स्थानीय समुदाय पर उनके वास्तविक प्रभाव का अध्ययन किया गया है।
2. बमोरी ब्लॉक में संचालित प्रमुख योजनाओं की सूची
- सहरिया विशेष आहार अनुदान योजना (प्रतिमाह 1500 रुपये पोषण आहार हेतु)
- मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना (महिला आर्थिक सशक्तिकरण)
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA)
- प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण (PMAY-G)
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM - आजीविका)
- जल जीवन मिशन (हर घर जल)
- आयुष्मान भारत - निरामय योजना
- लघु वनोपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना
3. चयनित योजनाओं का बमोरी के समुदाय पर प्रभाव
क. सहरिया विशेष आहार अनुदान योजना (PVTG Scheme)
चूंकि बमोरी में सहरिया जनजाति की बहुलता है, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सहरिया परिवारों की महिला मुखिया के खाते में कुपोषण दूर करने के लिए सीधे 1500 रुपये प्रतिमाह जमा किए जाते हैं।
सामुदायिक प्रभाव: इस प्रत्यक्ष नकद अंतरण (DBT) से सहरिया परिवारों की खाद्य सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। महिलाएं अब दालें, तेल और बच्चों के लिए दूध खरीद पा रही हैं। साहूकारों के पास छोटे-मोटे कर्ज के लिए जाने की मजबूरी कम हुई है。
ख. मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना
इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1250 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
सामुदायिक प्रभाव: बमोरी के ग्रामीण अंचलों में इस योजना ने मौन क्रांति का काम किया है। महिलाओं के पास अपनी व्यक्तिगत जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य के लिए नकद तरलता उपलब्ध हुई है। स्थानीय हाट-बाजारों (जैसे बमोरी, फतेहगढ़ हाट) में महिलाओं की क्रय शक्ति और उपस्थिति बढ़ी है。
ग. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) - स्व-सहायता समूह
बमोरी ब्लॉक में 'आजीविका मिशन' के तहत हजारों ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों (SHGs) में जोड़ा गया है।
सामुदायिक प्रभाव: पारंपरिक रूप से केवल घरों और खेतों तक सीमित महिलाएं अब सिलाई, बकरी पालन, और मसाला निर्माण का कार्य कर रही हैं। क्षेत्र में 'बैंक सखी' और 'कृषि सखी' के रूप में महिलाओं का नेतृत्व उभरा है, जिससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है。
घ. जल जीवन मिशन
पहाड़ी और पथरीला क्षेत्र होने के कारण बमोरी में पेयजल हमेशा से एक चुनौती रहा है। 'हर घर नल' योजना के तहत टंकियों और पाइपलाइनों का जाल बिछाया गया है।
सामुदायिक प्रभाव: महिलाओं और बालिकाओं का जो समय दूरस्थ कुओं या झिरियों से पानी ढोने में बर्बाद होता था, उसकी बचत हुई है। हालांकि, ग्रीष्म ऋतु में कुछ गाँवों में जल स्रोत सूखने की तकनीकी समस्या अभी भी मौजूद है。
4. कमियाँ एवं सुधारात्मक निष्कर्ष
योजनाओं का प्रभाव सकारात्मक है, किंतु बमोरी के दूरस्थ अंचलों में डिजिटल साक्षरता की कमी, सर्वर डाउन रहने की समस्या और फिंगरप्रिंट न आने (बायोमेट्रिक विफलता) के कारण कई वृद्ध और आदिवासी हितग्राही परेशान होते हैं। इन योजनाओं के साथ-साथ बमोरी में स्थायी सिंचाई और आजीविका के साधन विकसित करना दीर्घकालिक विकास के लिए अनिवार्य है।