1. प्रस्तावना
मानव विकास का तात्पर्य केवल प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि नहीं है, बल्कि समुदाय के जीवन स्तर, शिक्षा की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच में सुधार करना है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के मानकों के अनुरूप, प्रस्तुत आलेख में गुना जिले के बमोरी विकास खंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत/स्थानीय क्षेत्र की वर्तमान मानव विकास स्थिति का जमीनी और तथ्यात्मक मूल्यांकन किया गया है।
2. स्थानीय क्षेत्र का जनसांख्यिकीय स्वरूप
बमोरी ब्लॉक के इस चयनित अंचल में विभिन्न जातियों के साथ-साथ सहरिया जनजाति की सघन बस्ती (सहराना) स्थित है। क्षेत्र की कुल आबादी लगभग 4,200 है। आजीविका का मुख्य आधार कृषि मजदूरी और वनोपज संग्रहण है।
3. मानव विकास के प्रमुख संकेतकों की तथ्यात्मक स्थिति
क. ज्ञान एवं शिक्षा का स्तर (Education & Literacy)
स्थानीय स्तर पर प्राथमिक और माध्यमिक शालाएं उपलब्ध हैं, किंतु गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक चुनौती है।
- साक्षरता दर: क्षेत्र की औसत साक्षरता दर लगभग 62% है, जो राज्य के औसत से कम है। पुरुष साक्षरता 74% है जबकि महिला साक्षरता मात्र 48% के आस-पास है।
- नामांकन एवं उपस्थिति: प्राथमिक स्तर पर बच्चों का नामांकन 90% से अधिक है, किंतु कटाई के समय परिवारों के पलायन के कारण वास्तविक उपस्थिति 50-60% ही रह जाती है। बालिकाओं के लिए उच्च शिक्षा हेतु गुना शहर जाना पड़ता है, जिससे 8वीं के बाद ड्रॉपआउट दर बढ़ जाती है।
ख. दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन (Health & Nutrition)
बमोरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य सुविधाएं निर्भर हैं।
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य: जननी सुरक्षा योजना और आशा कार्यकर्ताओं के प्रयासों से संस्थागत प्रसव की दर 80% तक पहुँची है। किंतु सहरिया समुदाय में आज भी घरेलू प्रसव के मामले देखे जाते हैं।
- कुपोषण की स्थिति: क्षेत्र में बच्चों के बीच अल्प-वजन और स्टंटिंग (नाटापन) की दर चिंताजनक है। पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) की सक्रियता के बावजूद घरेलू स्तर पर खाद्य सुरक्षा का अभाव कुपोषण का मुख्य कारण है।
ग. जीवन स्तर एवं बुनियादी सुविधाएं (Standard of Living)
| बुनियादी आयाम | बमोरी क्षेत्र की वर्तमान तथ्यात्मक स्थिति |
|---|---|
| पेयजल व्यवस्था | 'जल जीवन मिशन' के तहत पाइपलाइन बिछाई गई है, किंतु ग्रीष्म ऋतु में जल स्रोत सूखने से हैंडपंपों और टैंकरों पर निर्भरता बढ़ जाती है। |
| आवास स्थिति | प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत कई पक्के मकान बने हैं, किंतु सहरिया बस्तियों में आज भी कच्चे और खपरैल वाले घर अधिक हैं। |
| स्वच्छता एवं बिजली | गाँव पूर्णतः विद्युतीकृत है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने 30% शौचालयों का उपयोग पानी की कमी के कारण भंडारण हेतु हो रहा है। |
4. विकासात्मक चुनौतियाँ एवं समाधान
बमोरी क्षेत्र के मानव विकास सूचकांक को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक आजीविका की असुरक्षा और दूरस्थ भौगोलिक स्थिति है। सुधार हेतु बमोरी में ही कृषि आधारित कुटीर उद्योगों की स्थापना, स्थानीय शालाओं में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना और स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति अनिवार्य है।
5. निष्कर्ष
विगत एक दशक में बमोरी क्षेत्र में सड़क और बिजली जैसी ढांचागत सुविधाओं में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। हालांकि, जब तक शिक्षा के स्तर और सहरिया समुदाय के पोषण में गुणात्मक सुधार नहीं होगा, तब तक वास्तविक मानव विकास का लक्ष्य अधूरा रहेगा।