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अध्ययन क्षेत्र: विकास खंड बमोरी, जिला गुना (मध्य प्रदेश)

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ग्रामीण व्यवस्था के विषय (बमोरी)
समाज कार्य अभ्यास के क्षेत्र

असाइनमेंट 2: बमोरी विकास खंड की ग्रामीण व्यवस्था के प्रमुख विषय एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन

1. बमोरी की ग्रामीण व्यवस्था के प्रमुख विषयों की सूची

गुना जिले का बमोरी विकास खंड अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति (वनों और पहाड़ियों से घिरा अंचल) और जनसांख्यिकी के लिए जाना जाता है। यहाँ की ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था के प्रमुख विषयों को निम्नलिखित रूप में सूचीबद्ध किया जा सकता है:

  1. वर्षा आधारित कृषि, मिट्टी का कटाव और सिंचाई साधनों की स्थिति
  2. सहरिया जनजाति का वनोपज (NTFP) पर निर्भरता और आजीविका संकट
  3. मौसमी श्रम प्रवासन (Seasonal Migration) और उसके पारिवारिक प्रभाव
  4. ग्रामीण स्वास्थ्य संरचना, कुपोषण एवं झोलाछाप डॉक्टरों पर निर्भरता
  5. पंचायती राज संस्थाओं में जनजातीय सहभागिता और पेसा एक्ट (PESA Act) का प्रभाव
  6. स्थानीय साख व्यवस्था एवं साहूकारी ऋणग्रस्तता
  7. पेयजल संकट (विशेषकर ग्रीष्म ऋतु में भूजल स्तर का गिरना)

2. चयनित प्रमुख विषयों पर विश्लेषणात्मक लेख

क. कृषि संकट एवं आजीविका के साधन

बमोरी ब्लॉक की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। यहाँ सोयाबीन, मक्का, ज्वार और धनिया की खेती प्रमुखता से होती है। किंतु क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा असिंचित है। मानसून की अनिश्चितता और जंगली जानवरों (रोझ/नीलगाय) द्वारा फसलों को नुकसान पहुँचाना यहाँ के किसानों की सबसे बड़ी समस्या है। सहरिया समुदाय के पास कृषि भूमि का आकार बहुत छोटा है या वे भूमिहीन हैं। वे अपनी आजीविका के लिए महुआ, तेंदूपत्ता और गोंद जैसी लघु वनोपज के संग्रहण पर निर्भर करते हैं, जिसका उचित मूल्य बिचौलियों के कारण उन्हें नहीं मिल पाता।

ख. श्रम प्रवासन (Migration) की गंभीर समस्या

स्थानीय स्तर पर गैर-कृषि रोजगार के अवसरों के अभाव के कारण बमोरी के दर्जनों गाँवों से हर साल दीपावली के बाद और होली के आस-पास बड़े पैमाने पर पलायन होता है। ग्रामीण मजदूर राजस्थान के बारां, कोटा या गुजरात के सीमांत शहरों में ईंट-भट्ठों और निर्माण स्थलों पर काम करने जाते हैं। इस प्रवासन का सबसे बुरा असर बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है। गाँव के गाँव महीनों तक सूने दिखाई देते हैं, जहाँ केवल वृद्धजन रह जाते हैं।

ग. पंचायती राज और 'पेसा एक्ट' (PESA) का क्रियान्वयन

चूंकि बमोरी एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लागू 'पेसा एक्ट' (पंचायत अनुसूचित क्षेत्र विस्तार अधिनियम) यहाँ अत्यंत प्रासंगिक है। इस कानून ने ग्राम सभाओं को जल, जंगल और जमीन के प्रबंधन के विशेष अधिकार दिए हैं। यद्यपि कागजों पर सहरिया समुदाय और महिलाओं को पंचायत स्तर पर प्रतिनिधित्व प्राप्त है, किंतु व्यावहारिक रूप से आज भी स्थानीय दबंगों और साहूकारों का प्रशासनिक निर्णयों पर प्रभाव देखा जाता है। समाज कार्य अभ्यास के नजरिए से यहाँ विधिक साक्षरता (Legal Literacy) की सख्त आवश्यकता है।

3. निष्कर्ष

बमोरी विकास खंड की ग्रामीण व्यवस्था में सुधार के लिए केवल सरकारी अनुदान पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए जल संग्रहण (Water Harvesting) ढांचों का निर्माण, वनाधिकार पट्टों का वास्तविक लाभ दिलाना और मनरेगा (MGNREGA) के तहत गाँव में ही वर्ष भर स्थायी रोजगार के अवसर सृजित करना आवश्यक है। एक पेशेवर समाज कार्यकर्ता समुदाय को संगठित कर इन विकासात्मक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।